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Triyuginarayan Temple Uttarakhand in hindi | त्रियुगीनारायण मंदिर उत्तराखंड

त्रियुगीनारायण मंदिर कहाँ स्थित है?, इतिहास, कहानी, शिव-पार्वती विवाह स्थल, ऊँचाई, अखंड धुनी, कैसे पहुंचे?, कहाँ रहें? Triyuginarayan Temple Rudraprayag, All information, History, Story, Location, Timings, Best time to visit, How to reach, Photos, Height, Wedding Destination, Structure, Architecture, Lord Shiva and Goddess Parwati Wedding Place

Table of Contents

त्रियुगीनारायण मंदिर कहाँ स्थित है? (Triyuginarayan Temple Location in hindi)

Triyuginarayan Temple उत्तराखंड के जनपद रुद्रप्रयाग में स्थित है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है, यहाँ विष्णु के पांचवें अवतार, वामन अवतार की पूजा की जाती है। परन्तु त्रियुगीनारायण मंदिर भगवान शंकर और माता पार्वती के विवाह स्थल के रूप में भी जाना जाता है। शिव-पार्वती के इस विवाह में स्वयं भगवान विष्णु ने पार्वती के भाई और ब्रह्मा ने पुरोहित के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया था।

Triyuginarayan Temple
image credit- Social Media

भगवान शंकर ने पर्वतराज हिमावत की पुत्री पार्वती से मन्दाकिनी क्षेत्र के त्रियुगिनारायण गाँव में यहाँ जलने वाली अग्नि की ज्योति के सामने विवाह किया था। मन्दिर के अन्दर प्रज्ज्वलित अग्नि कई युगों से जल रही है, इसलिए इस स्थल का नाम “त्रियुगी” हो गया। त्रियुगी का मतलब है वह अग्नि जो तीन युगों से जल रही है।

अब लाखों लोग त्रियुगीनारायण मंदिर में अपना विवाह संपन्न करने आते हैं, लोगों का मानना है की यहाँ विवाह करने से दांपत्य जीवन सुखी से व्यतीत होता है। आज के आर्टिकल में हम आपको त्रियुगीनारायण, शिव-पार्वती विवाह स्थल के बारे में विस्तृत जानकारी देने वाले हैं।

वामन द्वादशी मेला त्रियुगीनारायण मंदिर- Vaman/Baman Dwadashi Mela Triyuginarayan Temple

भगवान विष्णु को समर्पित त्रियुगीनारायण मंदिर में साल में एक बार वामन द्वादशी मेले का आयोजन किया जाता है, इस वर्ष 26 सितम्बर 2023 को वामन द्वादशी के भव्य मेले का आयोजन होगा। यह मेला मुख्य रूप से संतान प्राप्ति के लिए प्रसिद्द है, इस मेले में देशभर से श्रद्धालु हजारों-लाखों की संख्या में संतान प्राप्ति की मांग लेकर मंदिर पहुँचते हैं, इस मंदिर को निसंतान दम्पतियों की मनोकामना पूर्ण करने वाला धाम भी कहा जाता है। इस दिन समस्त त्रियुगीनारायण क्षेत्रवासी वामन द्वादशी मेले का उत्सव मनाते हैं और भगवान विष्णु से अपनी मनोकामना पूर्ण करने का आशीर्वाद लेते हैं।

त्रियुगीनारायण मंदिर संक्षिप्त जानकारी (Triyuginarayan Temple in hindi)

राज्य (State)उत्तराखंड
जनपद (District)रुद्रप्रयाग
धर्महिन्दू
देवी-देवताविष्णु, शिव-पार्वती
मंदिर समयावधि7:00 am – 2:00 pm (Morning)
4:00 pm – 8:00 pm (Evening)
दर्शन करने का समय30 मिनट से 1 घंटा
प्रवेश शुल्कनहीं
ऊँचाई1980 मीटर
नजदीकी रेलवे स्टेशनऋषिकेश (187 km)
नजदीकी एअरपोर्टजॉलीग्रांट एअरपोर्ट, देहरादून (200+ km)
कैसे पहुंचें?फ्लाइट, ट्रेन, बस

त्रियुगीनारायण मंदिर इतिहास (Triyuginarayan Temple History in hindi)

हिन्दू पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव की पहली पत्नी माता सती ने उनके पिता राजा दक्ष द्वारा शिव के अपमान किये जाने पर अग्नि कुंड में कूद कर आत्म दाह कर दिया था। इससे भगवान शिव को काफी ठेस पहुँची और उन्होंने राजा दक्ष का वध करके लम्बी योग साधना में जाने का निश्चय किया।

माता सती ने पर्वतराज हिमावत के यहाँ पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लिया, पार्वती ने उत्तराखंड के गौरीकुंड नामक स्थान पर कई वर्षों तक भगवान शंकर की कठोर तपस्या की। माँ पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए, तब माँ पार्वती ने शिव के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा।

माता पार्वती ने कठिन तपस्या और साधना से शिव की आराधना की और शिव को पाया था। त्रियुगीनारायण से 5 km दूर गौरीकुंड में माँ पार्वती ने शिव को पाने के लिए कठिन ध्यान और साधना की थी। जो श्रद्धालु त्रियुगीनारायण जाते हैं वो गौरीकुंड के दर्शन भी करते हैं। पौराणिक ग्रन्थ बताते हैं कि शिव ने माता पार्वती के समक्ष केदारनाथ मार्ग में पड़ने वाले गुप्तकाशी विवाह प्रस्ताव रखा था। तब से अब तक यहाँ अनेकों जोड़े विवाह बंधन में बंधते हैं। और “अखंड धुन्नी” की भस्म को अपने साथ ले जाते हैं।

लोगों का मानना है की यहाँ शादी करने से दांपत्य जीवन सुखी से व्यतीत होता है। भगवान शिव और माँ पार्वती के इस विवाह में भगवान विष्णु ने माँ पार्वती के भाई के रूप में सभी रीति-रिवाजों का पालन किया था तथा ब्रह्मा जी इस विवाह में पुरोहित बने थे। सभी संत-मुनियों ने इस विवाह में भाग लिया था।

अपनी इस अनुपम विशेषता के कारण ये स्थान विवाह के बंधन में बंधने वाले जोड़ों के मध्य एक प्रमुख विवाह स्थल के रूप में उभर रहा है। यहाँ गढ़वाल निगम विकास मंडल का एक अतिथि गृह भी है।

त्रियुगीनारायण: शिव-पार्वती विवाह स्थल (Triyuginarayan Temple: A New Wedding Destination in hindi)

Triyuginarayan Temple
image credit- bookmychardhamyatra

त्रियुगीनारायण में शिव-पार्वती का विवाह संपन्न होने की वजह से यह मंदिर अब वैवाहिक जीवन के बंधन में बंधने जा रहे जोड़ों के लिए एक वैवाहिक स्थल के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त कर चुका है। पिछले कुछ ही वर्षों में इस मंदिर में हजारों जोड़ों के विवाह संपन्न हुए हैं। त्रियुगीनारायण मंदिर में बड़ी-बड़ी हस्तियाँ शादी करने आते हैं।

त्रियुगीनारायण मंदिर ऊँचाई (Triyuginarayan Temple Height in hindi)

त्रियुगीनारायण एक हिन्दू धार्मिक मंदिर है, यह मंदिर समुद्रतल से 1980 मीटर की ऊँचाई पर है।

त्रियुगीनारायण मंदिर संरचना (Triyuginarayan Temple Structure/Architecture in hindi)

Triyuginarayan Temple

त्रियुगीनारायण मंदिर (Triyuginarayan Temple) केदारनाथ मंदिर शैली में बनाया गया है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस स्थान पर मंदिर स्थापित करने का श्रेय आदि गुरु शंकराचार्य को दिया जाता है। बाद में कई सारे परिवर्तनों के साथ मंदिर वर्तमान स्वरुप में आया। त्रियुगीनारायण के अतिरिक्त आदि गुरु शंकराचार्य ने उत्तराखंड में अनेक मंदिरों का निर्माण किया है। इन मंदिरों में प्रमुख हैं- केदारनाथ, बद्रीनाथ, तुंगनाथ, आदि।

ब्रह्मा कुंड (Brahma Kund)

यह कुंड मंदिर में स्थित तीन कुंडों विष्णु कुंड, रूद्र कुंड और ब्रह्मा कुंड में से एक है। शिव और माता पार्वती के विवाह को ब्रह्मा जी ने स्वयं पुरोहित बनकर संपन्न करवाया था। विवाह संस्कार शुरू करने से पहले ब्रह्मा जी ने जिस कुंड में स्नान किया था उसे ब्रह्मा कुंड के नाम से जाना जाता है।

ब्रह्मा शिला (Brahma Shila)

ब्रह्मा शिला में ही भगवान शंकर और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था।

विष्णु कुंड (Vishnu Kund)

इस कुंड में भगवान विष्णु ने स्नान किया था और तब से इस कुंड को विष्णु कुंड के नाम से जाना जाता है।

रूद्र कुंड (Rudra Kund)

शिव-पार्वती के विवाह में शामिल हुए सभी देवी-देवताओं, संत मुनियों इस कुंड में स्नान किया था, बाद में इसे रूद्र कुंड नाम दिया गया। रूद्र कुंड को लेकर एक मान्यता है की अगर कोई निसंतान दम्पति इस कुंड में स्नान करते हैं तो उनकी संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी हो जाती है। अनेकों दम्पति देश के कोने-कोने से संतान प्राप्ति की इच्छा लेकर रूद्र कुंड में डुबकी लगाने आते हैं।

त्रियुगीनारायण मंदिर अखंड धुनी ( Triyuginarayan Akhand Dhunni in hindi)

त्रियुगीनारायण मंदिर (Triyuginarayan Temple) को अखंड धुन्नी मंदिर के नाम से जाना जाता है। हिन्दू धर्म के ग्रंथों के अनुसार इस मंदिर के अन्दर तीन युगों से अखंड धुन्नी जल रही है। “अखंड” शब्द से तात्पर्य है “लगातार” और “धुन्नी” का अर्थ है “अग्नि”। इस प्रकार अखंड धुन्नी का अर्थ हुआ लगातार जलने वाली अग्नि। तीन युगों से जल रही इस अग्नि के कारण ही इस मंदिर और इस पूरे क्षेत्र को त्रियुगीनारायण नाम दिया गया।

त्रियुगीनारायण मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय (Best Time To Visit Triyuginarayan Temple in hindi)

यह मंदिर साल के 12 महीने भक्तों के लिए खुला रहता है, आप कभी भी मंदिर जाकर भगवान विष्णु, भगवान शिव और माता पार्वती के दर्शन कर सकते हैं। यह मंदिर त्रियुगीनारायण गाँव के बीच में स्थित है, यहाँ वर्षभर श्रद्धालुओं और पर्यटक का तातां लगा रहता है। अगर यहाँ आने के सबसे उपयुक्त समय की बात करें तो यह समय से अक्टूबर से मार्च-अप्रैल तक होगा। मानसून के समय त्रियुगीनारायण या उत्तराखंड में किसी भी स्थान पर घूमने की योजना न बनाएं।

अक्टूबर से मार्च तक त्रियुगीनारायण का तापमान 0 से 15° डिग्री सेल्सियस और अप्रैल से सितम्बर तक 20-35° डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है। आप अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी समय यहाँ जाने की योजना बना सकते हैं।

त्रियुगीनारायण मंदिर कैसे पहुंचें (How To Reach Triyuginarayan Temple in hindi)

त्रियुगीनारायण तक केवल बस, टैक्सी, कार या बाइक से पहुंचा जा सकता है। हालाँकि, हरिद्वार-ऋषिकेश तक आप ट्रेन और देहरादून तक आप फ्लाइट से भी यात्रा कर सकते हैं। उस से आगे की यात्रा बस, टैक्सी और कार से ही की जा सकती है, जोकि आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं।

हरिद्वार से त्रियुगीनारायण मंदिर (Triyuginarayan Temple) पहुँचने के लिए आपको हरिद्वार-ऋषिकेश-तीन धारा-देवप्रयाग-श्रीनगर-धारीदेवी-रुद्रप्रयाग-अगस्त्यमुनि-चन्द्रपुरी-उखीमठ-सोनप्रयाग मुख्य पड़ावों से होकर जाना पड़ता है। सोनप्रयाग से केवल 12 km की दूरी पर ही त्रियुगीनारायण स्थित है।

फ्लाइट से त्रियुगीनारायण मंदिर कैसे पहुंचे? (Triyuginarayag Temple By Flight in hindi)

अगर आप फ्लाइट से त्रियुगीनारायण मंदिर (Triyuginarayan Temple) पहुंचना चाहते हैं तो आपको बता दें भारत के अधिकांश बड़े शहरों (दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता) से देहरादून स्थित जॉली ग्रांट एअरपोर्ट के लिए फ्लाइट उपलब्ध हो जाती है। यहाँ से आगे का सफ़र आपको बस, टैक्सी या कार से ही करना होता होता है, जो आपको रुद्रप्रयाग मेन मार्केट तक ले कर जायेंगे। रुद्रप्रयाग से आपको 1 या 2 बार टैक्सी बदलनी पढ़ सकती है।

ट्रेन से त्रियुगीनारायण मंदिर (Triyuginarayan Temple By Train in hindi)

अगर आप उत्तराखंड घूमना चाहते हैं तो आपको ये बात अवश्य पता होनी चाहिए कि यहाँ आपको ट्रेन की सुविधा केवल हरिद्वार-ऋषिकेश या देहरादून तक ही मिलेगी। ऋषिकेश (लगभग 216 km) त्रियुगीनारायण मंदिर उत्तराखंड से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है। यहाँ से आगे आपको बस, टैक्सी या कार से जाना होगा। अधिकांश लोग बस से घूमना ज्यादा पसंद करते हैं, बस का किराया, टैक्सी या कार के मुकाबले थोडा कम रहता है और लम्बे सफ़र का आनंद बस में ज्यादा आता है।

उत्तराखंड में चार धाम रेल परियोजना पर काम चल रहा है, यह काम लगभग 2025 तक पूरा हो जायेगा तब आप उत्तराखंड में कहीं भी ट्रेन से यात्रा कर सकते हैं।

बस से त्रियुगीनारायण मंदिर कैसे पहुंचें? (Triyuginarayan Temple By Bus in hindi)

त्रियुगीनारायण पहुँचने का सबसे अच्छा माध्यम बस से यात्रा करना है। अधिकांश यात्री बस से ही चार धाम यात्रा या कोई भी अन्य यात्रा करना पसंद करते हैं। हरिद्वार-ऋषिकेश (लगभग 216 km) से बस आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं।

त्रियुगीनारायण मंदिर केदारनाथ धाम जाने वाले मुख्य पढ़ाव सोनप्रयाग से केवल 12 km की दूरी पर स्थित है। जबकि गौरीकुंड त्रियुगीनारायण से केवल 5 km की दूरी पर स्थित है। गौरीकुंड से आप केदारनाथ और वासुकी ताल के लिए पैदल यात्रा शुरू करते हैं।

त्रियुगीनारायण में कहाँ रहें (Where To Stay In Triyuginarayan Temple? Hotels/Homestay)

अगर आप त्रियुगीनारायण मंदिर (Triyuginarayan Temple) जाने की योजना बना रहे हैं तो आपके मन में ये सवाल जरुर आया होगा कि वहां रहने की पूर्ण व्यवस्था है की नहीं? तो आप निश्चिंत हो जाइये, त्रियुगीनारायण गाँव में और गाँव के नजदीक ही आपको बहुत सारे होमस्टे या होटल मिल जायेंगे। इन होटलों और होमस्टे में आपको कम पैसों में ही खाने और रहने की उचित व्यवस्था मिल जाती है। एक रात ठहरने के केवल 500-1000 के बीच रूपये लिए जाते हैं

FAQs

Q- त्रियुगीनारायण मंदिर घूमने का सबसे अच्छा समय क्या है?

Ans- अक्टूबर से मार्च-अप्रैल मानसून के समय त्रियुगीनारायण या उत्तराखंड में किसी भी स्थान पर घूमने की योजना न बनाएं। अक्टूबर से मार्च तक त्रियुगीनारायण का तापमान 0 से 15° डिग्री सेल्सियस और अप्रैल से सितम्बर तक 20-35° डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है। आप अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी समय यहाँ जाने की योजना बना सकते हैं।

Q- त्रियुगीनारायण मंदिर कहाँ स्थित है?

Ans- त्रियुगीनारायण मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद में सोनप्रयाग से 12 km की दूरी पर स्थित है।

Q- त्रियुगीनारायण मंदिर का प्रमुख आकर्षण क्या है?

Ans- शिव-पार्वती विवाह स्थल। इसी स्थान पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। मान्यता है की जो भी दम्पति इस मंदिर में शादी करते हैं वो अपना दांपत्य जीवन सुखी से व्यतीत करते हैं। इसके अतिरिक्त इस मंदिर में भगवान विष्णु के पांचवें अवतार वामन अवतार की पूजा की जाती है और इस मंदिर में तीन युगों से “अखंड धुन्नी” जल रही है। साथ ही यहाँ ब्रह्मा कुंड, ब्रह्मा शिला, विष्णु कुंड और रूद्र कुंड भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है।

Q- त्रियुगीनारायण मंदिर कैसे पहुंचे?

Ans- त्रियुगीनारायण मंदिर पहुँचने के लिए हरिद्वार-ऋषिकेश तक आप ट्रेन में आ सकते हैं, यहाँ से आगे आपको आगे का सफ़र बस, टैक्सी या कार से करना होगा। ऋषिकेश से त्रियुगीनारायण की दूरी लगभग 216 km है, यहाँ से आपको बस आसानी से मिल जाती हैं। केदारनाथ धाम के मुख्य पढ़ाव सोनप्रयाग पहुँच कर इस मंदिर की दूरी केवल 12 km रह जाती है। जहाँ आप लोकल टैक्सी या बस की मदद से पहुँचते हैं।

Q- त्रियुगीनारायण के आस-पास घूमने की जगहें?

Ans- यहाँ आप केदारनाथ, वासुकी ताल, उखीमठ, देवरिया ताल आदि खूबसूरत जगहों में घूम सकते हैं। जोकि त्रियुगीनारायण से बहुत नजदीक पड़ती हैं।

Q- त्रियुगीनारायण मंदिर किसलिए प्रसिद्द है?

Ans- त्रियुगीनारायण मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और इसी मंदिर में भगवन शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। इस विवाह में भगवान विष्णु ने माँ पार्वती के भाई और ब्रह्मा ने पुरोहित के कर्तव्यों का निर्वहन किया था।

Q- त्रियुगीनारायण मंदिर की ऊँचाई कितनी है?

Ans- त्रियुगीनारायण मंदिर समुद्रतल से 1980 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।

Q- 2023 में वामन द्वादशी मेला त्रियुगीनारायण कब लगेगा?

Ans- 2023 में वामन द्वादशी मेला 26 सितम्बर 2023 को आयोजित किया जा रहा है।

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