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Koteshwar Mahadev Temple Rudraprayag | कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड

Koteshwar Mahadev Temple Rudraprayag: कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग, इतिहास, कहानी, कहाँ है?, कैसे पहुंचें?, जाने का सबसे अच्छा समय, कहाँ रुकें? ट्रेक, त्यौहार, Timings, Photos, History, Story, Best Time To Visit, How to reach, By Flight, By Train, By Bus, Structure, Architecture, Mahashivratri, Savan Festival, Trek, Hotels, Homestay,

कोटेश्वर महादेव मंदिर (Koteshwar Mahadev Temple Rudraprayag) उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित एक पवित्र स्थल और भगवान शिव को समर्पित मंदिर है, यह मंदिर रुद्रप्रयाग मेन मार्केट से केवल 3 km (3000 m) की दूरी पर अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है। कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग एक गुफा मंदिर है जहाँ भगवान शिव के प्राकृतिक रूप से निर्मित शिवलिंग की पूजा की जाती है। मान्यता है की भगवान शंकर इस गुफा में राक्षस भस्मासुर से के डर से छिप गए थे, बाद में भगवान विष्णु ने भस्मासुर का वध किया था। महाशिवरात्रि और सावन के महीने (जुलाई-अगस्त) में यहाँ भगवान शिव के भक्त लाखों की संख्या में पहुँचते हैं।

Koteshwar Mahadev Temple Rudraprayag

Table of Contents

कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग संक्षिप्त जानकारी (Koteshwar Mahadev Temple Rudraprayag)

मंदिर का नामकोटेश्वर मंदिर
स्थानरुद्रप्रयाग, उत्तराखंड
स्थापित14 वीं शताब्दी
मुख्य देवी/देवताभगवान शिव
संबंधित धर्महिंदू धर्म
प्रमुख आकर्षणगुफा के अन्दर शिवलिंग, आध्यात्मिक वातावरण
नदीअलकनंदा
सबसे अधिक श्रद्धालुसावन मास (जुलाई-अगस्त), महाशिवरात्रि
खुलने और बंद होने का समयसुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक
पर्यटन सुविधाएंयात्रियों के लिए आरामदायक स्थल, आद्यात्मिक वातावरण, विधि-विधान की सुविधाएं, भजन और कीर्तन का आयोजन

कोटेश्वर महादेव मंदिर इतिहास (Koteshwar Mahadev Temple Rudraprayag History)

हिन्दू पौराणिक ग्रंथों के अनुसार मान्यता है कि जब भस्मासुर नामक एक राक्षस ने अपनी भक्ति और तपस्या से शिव को प्रसन्न किया और शिव से वरदान लिया कि जिसके सर में भी वो हाथ रखेगा वो उसी क्षण भस्म हो जाये। ऐसा वरदान प्राप्त करने के बाद भस्मासुर ने वरदान प्राप्ति की पुष्टि करने की लिए भगवान शंकर पर ही इसका प्रयोग करना चाहा।

भस्मासुर से बचने की लिए शिव अनेकों जगहों पर छुपे, अंत में वे कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग (Koteshwar Mahadev Temple Rudraprayag) में चुप गए, यह एक गुफा मंदिर है। यहाँ उन्होंने भस्मासुर का संहार करने की लिए भगवान विष्णु का ध्यान किया। बाद में भगवान विष्णु एक सुन्दर महिला “मोहनी” का रूप धारण करके भस्मासुर के समक्ष प्रकट हुए, राक्षस भस्मासुर मोहनी के रूप को देखकर अन्यंत मोहित हो गया और मोहनी के साथ नृत्य करने लगा।

अंततः मोहनी ने नृत्य करते-करते अपना हाथ अपने सर पर रखा,मोहनी की नृत्य को दोहराते हुए भस्मासुर ने भी अपना हाथ, सर पर रख दिया और भगवान शिव के वरदान के अनुसार खुद को ही भस्म कर दिया। इस प्रकार से भगवान विष्णु ने भस्मासुर का वध किया और तब भगवान शिव कोटेश्वर गुफा से बाहर आये।

एक दूसरी मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने केदारनाथ जाने से पहले कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग में कुछ समय के लिए ध्यान किया था और बाद में केदारनाथ चले गए। जो भी श्रद्धालु केदारनाथ यात्रा करते हैं उनमें से अधिकांश कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग (Koteshwar Mahadev Temple Rudraprayag) में शिव के दर्शन करने अवश्य आते हैं।

कोटेश्वर महादेव मंदिर स्थापत्य कला (Temple Structure)

Koteshwar Mahadev Temple Rudraprayag
image credit- holidayrider

कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग (Koteshwar Mahadev Temple Rudraprayag) एक गुफा मंदिर है, यहाँ गुफा के अन्दर प्राकृतिक रूप से निर्मित शिवलिंग की पूजा की जाती है। शिवलिंग के अतिरिक्त गुफा के अन्दर माता पार्वती, माँ दुर्गा, गणेश और नाग देवता की भी मूर्तियाँ हैं, माना जाता है कि ये सभी मूर्तियाँ प्राकृतिक रूप से यहाँ अवतरित हुई हैं। गुफा के बाहर बड़ी-बड़ी चट्टानों पर सुन्दर कलाकृतियाँ की गयी हैं, जो इस जगह को और भी सुन्दर बना देती हैं।

Koteshwar Mahadev Temple Rudraprayag
कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग

कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग से कुछ ही मीटर की दूरी पर ही अलकनंदा नदी बह रही है। मानसून से समय कभी-कभी नदी का जलस्तर बढ़ने से कोटेश्वर गुफा भी जलमग्न हो जाती है। अलकनंदा नदी के समीप ही एक शनि मंदिर भी है जिसमे शनिदेव की एक विशाल मूर्ती स्थापित की गयी है।

इसके अतिरिक गुफा से थोड़ी ही दूरी पर एक बहुत बड़ा मंदिर भी बनवाया गया है, इसी मंदिर में सभी पूजा-पाठ किये जाता हैं, यहाँ अन्य देवी-देवताओं के कई छोटे-छोटे मंदिर भी देखने को मिले हैं, सभी श्रद्धालु अपनी श्रधा भक्ति से यहाँ सभी देवी-देवताओं की पूजा करते हैं।

कोटेश्वर महादेव मंदिर निर्माण (Koteshwar Mahadev Temple Rudraprayag)

कोटेश्वर महादेव मंदिर के निर्माण जे बारे में अधिक साक्ष्य नहीं मिलते हैं। माना जाता है की कोटेश्वर मंदिर की यह गुफा भस्मासुर के काल से इसी स्वरुप में हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर का निर्माण 14 वीं शताब्दी में किया गया था और फिर 17 वीं शताब्दी में मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया। जीर्णोधार करते-करते मंदिर वर्तमान स्वरुप में आया।

कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग स्थिति (Koteshwar Mahadev Temple Location)

कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग (Koteshwar Mahadev Temple Rudraprayag) मेन मार्केट से केवल 3 km (3000 m) की दूरी पर स्थित है। कोटेश्वर मंदिर, रुद्रप्रयाग में बेलनी पुल से दायीं ओर कार्तिक स्वामी मंदिर वाले मार्ग पर पड़ता है।

कोटेश्वर मंदिर खुलने और बंद होने का समय(Koteshwar Mahadev Temple Timings)

कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग सुबह से शाम तक भक्तों के लिए खुला रहता है, आप किसी भी समय यहाँ भोलेनाथ के दर्शन करने जा सकते हैं और मंदिर के आस-पास के मनोरम दृश्य का आनंद ले सकते हैं।

कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग ट्रेक(Koteshwar Mahadev Temple Rudraprayag Trek)

कोटेश्वर महादेव मंदिर सड़क से जुड़ा हुआ है, यहाँ यातायात की कोई असुविधा नहीं होती है। मंदिर के प्रवेश द्वार तक सडक की सुविधा है, मंदिर प्रवेश द्वार से लगभग 300-500 मीटर का ट्रेक करना होता है और आप मंदिर परिसर में पहुँच जाते हैं। मन्दिर तक पहुँचने के लिए सरकार द्वारा एक चौड़े और सुगम मार्ग का निर्माण किया गया है जिसमें चलने में कोई असुविधा नहीं होती है।

Koteshwar Mahadev Temple Rudraprayag
कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग

कोटेश्वर महादेव त्यौहार (Koteshwar Temple Rudraprayag Festival/Fair)

कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग (Koteshwar Mahadev Temple Rudraprayag) में साल भर भक्तों का जमावड़ा लगा रहता है, खासकर चार धाम यात्रा के दौरान भगवान शिव के भक्त और पर्यटक यहाँ बड़ी संख्या में पहुँचते हैं। लेकिन साल में महाशिवरात्रि के दिन और सावन के पूरे महीन यहाँ हजारों-लाखों के संख्या में भोलेनाथ के भक्त पहुँचते हैं और अलकनंदा नदी से जल लेकर भगवान शिव को अर्पित करते हैं।

कोटेश्वर मंदिर रुद्रप्रयाग महाशिवरात्रि (Koteshwar Mahadev Temple Mahashivratri)

महाशिवरात्रि के दिन कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग में भव्य मेला लगता है, देश के कोने-कोने से लोग यहाँ अपनी मनोकामना लेकर आते हैं। महाशिवरात्रि के महत्व के बारे में अनेक मान्यताओं में से एक मान्यता यह है की इसी दिन भगवान शिव ने पूरी सृष्टि को बचाने की लिए हलाहल विष ग्रहण किया था, और सृष्टि को विष से मुक्त किया था। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा-आराधना की जाती है और इससे प्रसन्न होकर शिव अपने भक्तों की मनचाही मनोकामना को पूर्ण करते हैं।

कोटेश्वर महादेव मंदिर सावन मेला (Koteshwar Mahadev Temple Rudraprayag Savan Festival)

महाशिवरात्रि के अलावा कोटेश्वर महादेव मंदिर (Koteshwar Mahadev Temple Rudraprayag) में सावन के महीने (जुलाई-अगस्त) में भक्तों के लाइन लगी रहती है, यहाँ अलकनंदा नदी से जल लाकर शिवभक्तों द्वारा भगवान शिव को जल चढ़ाया जाता है।

सावन के माह में शिव भक्तों द्वारा पैदल कांवड़ यात्रा की जाती है। कांवड़ यात्रा को लेकर बहुत सारी मान्यताएं हैं, एक मान्यता के अनुसार सर्वप्रथम भगवान परशुराम ने कांवड़ के जरिये भगवान शिव का जलाभिषेक किया था।

दूसरी मान्यता के अनुसार जब भगवान शिव ने समुद्रमंथन के दौरान अपने कंठ में विष ग्रहण किया था जिससे उनका कंठ नीला पढ़ गया, इसी वजह से शिव को नीलकंठ भी कहा जाता है। विष ग्रहण करने के बाद शिव पर इसका नकारात्मक प्रभाव पढना शुरू हो गया। इन नकारात्मक प्रभावों को दूर करने करने लिए चन्द्रमा को अपने मस्तक पर धारण कर लिया और सभी देवताओं ने गंगा जल से शिव का जलाभिषेक किया। माना जाता है यह सावन का महीना था।

सावन का महीना भगवान का प्रिय महीना है और इस माह में ऋषिकेश स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर में लाखों की संख्या में भगवान शिव के भक्त गंगाजल से उनका अभिषेक करते हैं। माना जाता है कि जो कोई भी इस माह भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करते हैं उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। 2023 के 4 जुलाई से कांवड़ यात्रा शुरू होने वाली है, इस यात्रा में शिव भक्त हरिद्वार से जल लेकर के

कोटेश्वर मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय (Best Time To Visit Koteshwar Mahadev Temple)

कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग (Koteshwar Mahadev Temple Rudraprayag) वर्ष भर शिव भक्तों और पर्यटकों के लिए खुला रहता है, यहाँ चारों धामों के जैसे कपाट बंद नहीं होते हैं। यहाँ का मौसम गर्मियों में न तो अधिक गर्म और नही सर्दियों में अधिक ठंडा होता है। लेकिन फिर भी कोटेश्वर महादेव मंदिर आने का सबसे अच्छा समय सितम्बर से जून तक होगा। मानसून के समय उत्तराखंड में कहीं भी यात्रा करने या घूमने की योजना न बनाएं। मानसून के समय सड़कों की बहुत बुरी स्थिति रहती है और जगह-जगह बादल फटना, भूस्खलन और पहाड़ टूटने की घटना होती रहती है।

कोटेश्वर मंदिर रुद्रप्रयाग कैसे पहुंचें? (How To Reach Koteshwar Mahadev Temple Rudraprayag)

कोटेश्वर महादेव मंदिर पहुंचना बहुत ही आसान है यहाँ हम आपको फ्लाइट, ट्रेन और बस के कोटेश्वर मंदिर कैसे पहुंचे के बारे में विस्तृत जानकारी देने वाले हैं।

कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग फ्लाइट से(Koteshwar Mahadev Temple Rudraprayag By Flight)

अगर आप फ्लाइट से उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में आना चाहते हैं और यहाँ घूमना चाहते हैं तो आपको ये जानकर निराशा होगी कि आप केवल देहरादून स्थित जॉलीग्रांट एअरपोर्ट तक ही फ्लाइट में आ सकते हैं। यह एअरपोर्ट देश के अधिकांश बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है। जॉलीग्रांट एअरपोर्ट के लिए आपको सभी जगहों से फ्लाइट आसानी से उपलब्ध हो जाती है। यहाँ से आगे का सफ़र आप बस, टैक्सी और कार से कर सकते हैं।

कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग ट्रेन से (Koteshwar Mahadev Temple Rudraprayag By Train)

ट्रेन से यात्रा करना सबसे सही और सस्ता रहता है, अधिकांश लोग ट्रेन से सफ़र करने में सहज महसूस करते हैं। उत्तराखंड में कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग (Koteshwar Mahadev Temple Rudraprayag) पहुँचने के लिए आपको नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश (लगभग 142 km) पहुंचना होता है। यहाँ से आगे ट्रेन नहीं जाती हैं, आगे की यात्रा बस, टैक्सी या कार से ही करनी होती है। ऋषिकेश-हरिद्वार में आपको रुद्रप्रयाग के लिए बहुत सारी बसें मिल जाती हैं।

कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग बस से (Koteshwar Mahadev Temple Rudraprayag By Bus)

उत्तराखंड आने वाले अधिकांश यात्री बस से ही यात्रा करते हैं, बस में यात्रा करना अन्य यातायात माध्यमों की तुलना में सस्ता और सुलभ होता है। कोटेश्वर महादेव मंदिर (Koteshwar Mahadev Temple Rudraprayag) के लिए ऋषिकेश या हरिद्वार से बस (Bus) आसानी से मिल जाती हैं। रुद्रप्रयाग पहुँचने के लिए आपको हरिद्वार-ऋषिकेश-तीन धारा-देवप्रयाग-श्रीनगर-धारी देवी मंदिर आदि मुख्य पड़ावों से होकर आना पड़ता है और फिर आप रुद्रप्रयाग पहुँचते हैं। कोटेश्वर महादेव मंदिर, रुद्रप्रयाग मेन मार्केट से केवल 3 km की दूरी पर स्थित है।

रुद्रप्रयाग में होटल और होमस्टे (Hotels/Homestay In Rudraprayag)

अगर आप कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग (Koteshwar Mahadev Temple Rudraprayag) में आने की योजना बना रहे हैं तो आप होटल की चिंता करना छोड़ दीजिये। आपको कोटेश्वर मंदिर के आस-पास कई होमस्टे मिल जायेंगे और यदि आप होटल में रहना चाहते हैं तो आपको रुद्रप्रयाग मेन मार्केट में बहुत सारे होटल मिल जाते है। आप अपने बजट के हिसाब से होटल का चुनाव कर सकते हैं।

अन्य मंदिर (Other Temples)

कोटेश्वर मंदिर के साथ-साथ यहाँ दुर्गा मंदिर, पार्वती मंदिर, गणेश मंदिर और हनुमान मंदिर भी हैं। कोटेश्वर मंदिर आने वाले सभी श्रद्धालु और पर्यटक इन मंदिरों में भी पूजा-अर्चना करते हैं।

उमरनारायण मंदिर (Umarnarayan Temple Near Koteshwar)

कोटेश्वर मंदिर से 2 km की दूरी और रुद्रप्रयाग से लगभग 5 km की दूरी पर स्थित इस मंदिर में भगवान विष्णु का निवास माना जाता है। यहाँ मंदिर को स्थापित करने का श्रेय आदि गुरु शंकराचार्य को दिया जाता है। उमरनारायण मंदिर, अलकनंदा नदी के समीप स्थित है। मंदिर की स्थापत्य शैली अद्वितीय है।

Koteshwar Mahadev Temple Rudraprayag
उमरनारायण मंदिर

FAQ

Q- कोटेश्वर महादेव मंदिर कहाँ स्थित है?

Ans- उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद में। यह मंदिर रुद्रप्रयाग मेन मार्केट से केवल 3 km की दूरी पर स्थित है।

Q- कोटेश्वर महादेव मंदिर किस नदी के तट पर स्थित है?

Ans- कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग, अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है। कोटेश्वर एक गुफा मंदिर है और भगवान शिव को समर्पित है। भगवान शिव ने इस गुफा में केदारनाथ जाने से पहले कुछ समय तक ध्यान किया था।

Q- कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग की क्या कहानी है?

Ans- कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग भगवान शिव को समर्पित है। यह एक गुफा मंदिर है जहाँ भगवान शिव दैत्य भस्मासुर से के डर से कुछ समय तक छिपे थे, बाद में भगवन विष्णु ने मोहनी रूप धारण करके भस्मासुर का वध किया था।

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